संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सोमवार, 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग करते हुए सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू होने पर सदन ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा संघ शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अवधि को शीतकालीन सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ाने को मंजूरी दी।

इसके बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को विचार एवं पारित कराने के लिए सदन में पेश किया। विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लेने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि सभी दल इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करें और इसके लिए कार्य मंत्रणा समिति में पहले ही समय निर्धारित किया जा चुका था। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस से कई बार चर्चा में भाग लेने की अपील भी की थी।

विधेयक पारित होने के बाद भी हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

संशोधित विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में बदलाव कर विलंब से होने वाले पंजीकरण को अधिक सख्त बनाना और समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है।

विधेयक के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति और सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।

यदि सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा। साथ ही, संबंधित प्राधिकारी को पंजीकरण की अनुमति देने से पहले जन्म या मृत्यु की सत्यता का अनिवार्य रूप से सत्यापन करना होगा।

इससे पहले सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल संचालित करने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्य छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी करने लगे। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर बयान देने की मांग की।

अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से प्रश्नकाल बाधित नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि प्रश्नकाल सदस्यों का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसके माध्यम से वे सरकार से जवाब मांगते हैं। उन्होंने सदन में तख्तियां और बैनर लाने को संसदीय परंपराओं और मर्यादा के विरुद्ध बताया। लगातार हंगामे के चलते उन्होंने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी थी।

उधर, राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की शुरुआत में विभिन्न मंत्रियों ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखे तथा ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने अपने मंत्रालय से संबंधित फर्जी खबरों पर रोक लगाने की व्यवस्था की समीक्षा संबंधी संसदीय समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर वक्तव्य दिया।

शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर हर मुद्दे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है और लोकतंत्र का मजाक बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता विपक्ष के व्यवहार को देख रही है और उसे कभी माफ नहीं करेगी।

लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा के सभापति ने भी सदन की कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

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